♥️🙏🌹आरती श्रीमद्भगवद् गीता♥️🙏🌹
करो आरती श्रीगीता जी की,
जग की तारन हार त्रिवेनी।
स्वर्ग धाम की सुगम नसेनी |
अपरम्पार शक्ति की देनी।
जय जय हो सदा पुनीत की।
ज्ञानदीप की दिव्य ज्योति।
सकल जगत की तुम विभूति ॥
महानिशातीत प्रभा पूर्णिमा |
प्रबल शक्ति भयभीत की ||
अर्जुन की तुम सदा दुलारी।
सखा कृष्ण की प्राण पियारी ॥
षोडशकला पूर्ण विस्तारी।
छाया नम्र विनीता की॥
श्याम का हित करने वाली।
मन का सब मैल हरने वाली ॥
सब उमंग नित भरने वाली।
परम् प्रेमिका कान्हा की ||
♥️🙏🌹जय हो श्याम जी की ♥️🙏🌹
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