आरती श्रीकृष्ण जी की
आरती युगल किशोर की कीजै।
राधा तन मन धन न्यौछावर कीजै ॥ टेक ॥
रवि शशि कोटि बदन की शोभा ।
ताहि निरख मेरो मन लोभा ॥ आरती ॥१
गौर श्याम मुख निरखत रीझे ।
प्रभु को स्वरूप नयन भर पीजे ॥ आरती ॥२
कंचन थार कपूर की बाती ।
हरि आये निर्मल भई छाती ॥ आरती ॥३
फूलन की सेज फूलन की माला।
रत्न सिंहासन बैठे नन्दलाला ॥ आरती ।।४
मोर मुकुट कर मुरली सोहे ।
नटवर वेष देख मन मोहै ॥ आरती ॥५
ओढ्यो नील पीत पट सारी ।
कुंज - बिहारी गिरवरधारी ॥ आरती ॥६
श्री पुरुषोत्तम गिरवर धारी ।
आरती करत सकल ब्रजनारी ॥ आरती ।।
नन्द नन्दन वृषभान किशोरी ।
परमानन्द स्वामी अविचल जोड़ी ॥ आरती ।।
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