🌹🎈🕯️आरती श्री सालासरजी🌹🎈🕯️
जयति जय जय बजरंग बाला, कृपा कर सालासर बाला |
चैत सुदी पूनम को जन्मे, अंजनी पवन खुशी मन में ||
प्रकट भये सुर वानर तन में, विदित यश विक्रम विभुवन मे |
दूध पीवत स्तन मात के, नजर गई नभ ओर |
तब जननी की गोद से पहुंच, उदयाचल पर भोर |
अरुण फल लखि रवि मुख डाला |
तिमिर भूमंडल में छाई, चिबुक पर इंद्र वज्र बाए |
तभी से हनुमत कहलाए. द्धय हनुमान नाम पाये|
उस अवसर में रुक गयो, पवन सर्व उन्चास |
इधर हो गयो अंधकार, उत रुक्यो विश्व को श्वास |
भये ब्रह्मादिक बेहाला |
देव सब आये तुम्हारे आगे, सकल मिल विनय करन लागे |
पवन कू भी लाए सागे, क्रोध सब पवन तना भागे |
सभी देवता वर दियो, अरज करी कर जोड़ |
सुनके सबकी अरज गरज, लखि दिया रवि को छोड़ |
हो गया जग में उजियाला |
रहे सुग्रीव पास जाई, आ गये वन में रघुराई |
हरी रावण सीतामाई, विकल फिरते दोनों भाई |
विप्र रूप धरि राम को, कहा आप सब हाल |
कपि पति से करवाई मित्रता, मार दिया कपि बाल |
दुख सुग्रीव तना टाला |
आज्ञा ले रघुपति की धाया, लंक में सिंधु लांघ आया |
हाल सीता का लख पाया, मुद्रिका दे वनफल खाया |
वन विध्वंस दशकंध सुत, वध कर लंक जलाय |
चूड़ामणि संदेश सिया का, दिया राम को आय |
हुए खुश त्रिभुवन भूपाला |
जोड़ी कपि दल रघुवर चाला, कटक हित सिंधुबांध डाला |
युद्ध रच दीन्हा विकराला, कियो राक्षस कुल पैमाला |
लक्ष्मण को शक्ति लगी, लायौ गिरो उठाय |
देई संजीवन लखन जियाये, रघुवर हर्ष सवाय |
गरब सब रावन का गाला |
रची अहिरावन ने माया, सोवते राम लखन लाया|
बने वहां देवी की काया, करने को अपना चित चाया |
अहिरावन रावन हत्यों , फेर हाथ को हाथ |
मंत्र विभीषण पाय आपको, हो गयो लंका नाथ |
खुल गया करमा का ताला |
अयोध्या राम राज्य कीना, आपको दास बना दीना |
अतुल बल घृत सिंदूर दीना, लसत तन रूप रंग भीना |
चिरंजीव प्रभु ने कियो, जग में दियो पुजाय |
जो कोई निश्चय कर के ध्याये, ताकी करो सहाय |
कष्ट सब भक्त का टाला |
भक्तजन चरण कमल सेवे, जात आत सालासर देवे |
ध्वजा नारियल भोग देवे, मनोरथ सिद्धि कर लेवे |
कारज सारों भक्त के, सदा करो कल्याण |
विप्र निवासी लक्ष्मणगढ़ के, बालकृष्ण धर ध्यान |
नाम की जपे सदा माला |
♥️🙏🌹 सालासर के हनुमान की जय ♥️🙏🌹
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