♥️🙏🌹आरती श्री शंकरजी♥️🙏🌹1
शंकर तेरी जटा में बहती है गंगधारा।
काली घटा के अंदर जिमि दामिनी उजारा ॥
गल मुंडमाला राजे शशि भाल में विराजे।
डमरू निदान बाजे कर में त्रिशूल भारा ।।
दृग तीन तेज राशि कटिबंध नाग फांसी।
गिरिजा हैं संग दासी सब विश्व के अधारा ॥
मृग चर्म भस्मधारी वृषभराज पर सवारी।
निज भक्त दुखहारी कैलाश में विहारा ।।
शिव नाम जो उचारे सब पाप दोष टारे ।
ब्रह्मानंद ना बिसारे भव सिंधु पार तारा ॥
शंकर तेरी जटा में बहती है गंगधारा।
काली घटा के अंदर जिमि दामिनी उजारा॥
♥️♥️🌹जय हो भोले भंडारी की ♥️🙏🌹
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