यमुना जी की सायंकाल की आरती
जय जय श्री जमुने मां जय जय श्री जमुने ॥ टेक ॥
श्री गौ लोक निवासिनि वासिन ब्रज रमने।
सुर्पसूता संज्ञा उर जन्मी, जय जय अवतरने ॥ जय ॥
उत्तर दिशि कर पावन-पावन तप करने।
मुनि कालिन्द मन मर्दन अर्दन स्वीकरने ॥ जय ॥
दहन देख तन गिरिवर आरत, स्तुति करने।
तेन्ह अपराध क्षमा कर रस मय श्रीपतने ।। जय ।।
जतन तरणि समर्पित जम्बू तरु गवने ।
छन्न भिन्न कर पावन दाहन अघ हरने ॥ जय ॥
ब्रज लीला सर रंजित माथुर कुल भरने।
श्री विश्रान्त विहरिणी तारण दुःख हरने। जय ॥
श्री नव नीत प्रिया उर आनन्द चित्त करने।
रास रसिक मण्डित पण्डित भव तरने ।। जय ॥
सायंकाल करे जो आरति मन बच क्रम करने।
हे यमफन्द निवृत्ति वृत्ति प्रभु भरने ॥ जय इति ll

No comments:
Post a Comment
SEND FEEDBACK AND SUGGESTION FOR IMPROVEMENT