आरती श्री गंगा जी की
जब जय श्री गंगा देवि जय महेश रानी ॥ टेका ॥
और वरण तन विशाल हंसानन कंठ माल
सेवत सुर भोक पाल,चतुर फल निदानी। जय-जय
आवत आनन्द निदान दूजी को तुम समान,
कवि- जन गुण करत गान,
श्वति पुराण वानी-जय जय०
विकुल नृत्य धन्य हेत प्रकटी भव
सिन्धु मेत- विष्णु पदी दिवि निकेत
विधि सुरेश मानी। जय०-
निर्मल वर बहत नीर भंजन
भव अनित भीर- हरि विलास
वास तीर देउ कीनजानी। जय-जय०
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