जमुना जी की आरती

 




                    संध्या आरती जमुना जी की


धन्य श्री जमुने माँ, धन्य श्री जमुने। 

कलि के कल मल हरनी, सर्व पाप दमनी ॥ धन्यः ॥ 

रवि की आप सुता केव की पटरानी। 

तुमरे यश को गाव, ना शुक ज्ञानी ॥ धन्यः । 

जो नीराजन देखे सबरे दुख हरी ॥ धन्या 

कार्तिक सुदी दुतिया को जो कोई हाये। 

निश्चय वही मानुष विष्णु धाम पावै ॥ धन्यः ॥


सन्ध्योमय नीराजन जो दर्शन नित्त करो।


जमुना जी की आरति जो कोई गाये।


जनम जनम सो वांछित फल पावै ॥ धन्यः ॥

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